कितना गहरा है जाल जिंदगी का,खबर थी तुझे !!!
जीना कैसे है इसमे, सिखाया आके तूने मुझे !!!
मेरे दिल के सूखे समंदर में समाया है तू ,
तेरे नैनो में डूबी तिलमिलती मछली मै हूँ !!!
ले चल मुझे परिंदे की ऊची उड़ान भर तू ,
उड़ना ना जाने, वो काले आसमान की तितली मै हूँ !!!
तेरी मुस्कराहट की स्याही से कर रंगीन मुझे तू ,
एक बेरंग सांझ की बिखरी तस्वीर मै हूँ !!!
खींचे जो रिश्तो को करीब, वो डोर है तू ,
बंजर पडे समाज मे उलझी, एक उलझन मै हूँ!!!
जरूरतो को दरकिनार कर, बेकरार सी मेरी ख्वाहिश तू ,
दिन का सुकून गवा दिया, अब रातें भी तेरे नाम करती हूँ !!!
हो अगर मेरे बस में, तो छीन लू दुनिया से तुझे ,
हे तमन्ना तू मेरी, दिल ने इतनी सी की फ़रमाइश मुझे !!!