जैसे ख्वाब था तुमसे मिलना,
दिली ख्वाहिश थी तुम्हें पाना ।
जैसे मिल गया था खुदा खुद हमें,
जाग उठी थी तम्मना तन्हा दिल में ।।
क्या हुआ उस सुहाने वादों का,
चंद कसमें भी हम निभा न सका ।
प्यास मेरी बुझी ही कहाँ थी,
जो रुख बदल दिये तुमने सभी ।।
कमी शायद थी मुझमें कही,
कि खफा हुए तुम हमसे कभी ।
क्या खूब थी मजबूरी टूटे दिल की मेरी,
खुशी छोड के अपनी पा ली मुसकराहट तेरी ।।